तुम्हारा प्यार
मृगमरीचिका ही सही
मगर
फिर भी दौड़ती हूँ
क्यूँ ?
क्योंकि
तुम्हारा प्यार मिलने की आस भी
मुझे
सिर्फ इसी दिशा में दिखाती है....
by--raj jain.
Tuesday, August 10, 2010
Monday, August 9, 2010
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